Saturday, 31 July 2010
Monday, 26 July 2010
प्रख्यात पर्यावरणविद् और वैज्ञानिक प्रोफेसर जीडी अग्रवाल जी का आमरण अनशन आज सातवें दिन भी जारी
मातृ सदन, हरिद्वार। 26 जुलाई 2010। प्रख्यात पर्यावरणविद् और वैज्ञानिक प्रोफेसर जीडी अग्रवाल जी का आमरण अनशन आज सातवें दिन भी जारी है। प्रो. जीडी अग्रवाल जी का छोटा सा संकल्प है कि ‘गंगोत्री से लेकर धरासू तक 130 किलोमीटर गंगा की भागीरथी धारा को उसी रुप में रहने दो। ताकि आने वाला पीढ़ी इस गंगा को देख के समझे कि यही गंगा हमारे भारतवर्ष में बहती थी।‘ आज सरकार उसे भी नष्ट करने पर तुली है। इस संकल्प के साथ वे दो बार और अनशन कर चुके हैं।
स्वामी हंसदेवाचार्य ने कहा कि गंगा भारतीय संस्कृति का आधार और विश्व के आस्था का केन्द्र है। लोहारी नागपाला परियोजना जो की भागीरथी धारा पर बन रही है, को हम किसी कीमत पर बनने नहीं देंगे। संत समिति और गंगा महासभा सरकारों के इस प्रयास का पुरजोर विरोध करेंगे।
गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री आचार्य जितेन्द्र अनशन स्थल पहुंच कर अनशन को पूर्ण समर्थन देने कि घोषणा की है। मातृसदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद ने कहा कि केन्द्र सरकार ने परियोजना को हरी झंडी दिखाकर संत समाज के साथ धोखा किया है। लोहारी नागपाला गंगा और हिमालय को बहुत ज्यादा क्षति पहुंचायेगी।
प्रो. जी.डी अग्रवाल के अमरण अनशन के समर्थन में विभिन्न स्थानों पर लोगों ने 21 दिवसीय उपवास शुरू किए। साध्वी समर्पिता ने नानक पुरा सप्तऋषि ने अनशन जारी रखा है।
प्रो. अग्रवाल जी के इस उद्यात्त सत्याग्रह को समर्थन देने वालों का तांता लगा हुआ है। अग्रवाल जी के समर्थन में ग्राम अजीतुपर के डॉ. विजेन्द्र चौहान व श्री पूरणचन्द कश्यम एक दिवसीय उपवास में रहे। इसके अतिरिक्त आशीषगौड़, नीलिमास्वरुप मुजफ्फर नगर, दरभंगा बिहार से देवानन्द झा, मुम्बई से राजकुमार झा, खरीदाबाद से राखी, दिल्ली से साक्षी, देहरादून से नीतिन व सोनिया पाण्डे, इसके अतिरिक्त जिला बार काउन्सिल के अध्यक्ष एडवोकेट ललित उपाध्यक्ष, अरुण कुमार भदौरिया आदि ने अनशन अनशन स्थल पर आकर समर्थन किया।
स्वामी हंसदेवाचार्य ने कहा कि गंगा भारतीय संस्कृति का आधार और विश्व के आस्था का केन्द्र है। लोहारी नागपाला परियोजना जो की भागीरथी धारा पर बन रही है, को हम किसी कीमत पर बनने नहीं देंगे। संत समिति और गंगा महासभा सरकारों के इस प्रयास का पुरजोर विरोध करेंगे।
गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री आचार्य जितेन्द्र अनशन स्थल पहुंच कर अनशन को पूर्ण समर्थन देने कि घोषणा की है। मातृसदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद ने कहा कि केन्द्र सरकार ने परियोजना को हरी झंडी दिखाकर संत समाज के साथ धोखा किया है। लोहारी नागपाला गंगा और हिमालय को बहुत ज्यादा क्षति पहुंचायेगी।
प्रो. जी.डी अग्रवाल के अमरण अनशन के समर्थन में विभिन्न स्थानों पर लोगों ने 21 दिवसीय उपवास शुरू किए। साध्वी समर्पिता ने नानक पुरा सप्तऋषि ने अनशन जारी रखा है।
प्रो. अग्रवाल जी के इस उद्यात्त सत्याग्रह को समर्थन देने वालों का तांता लगा हुआ है। अग्रवाल जी के समर्थन में ग्राम अजीतुपर के डॉ. विजेन्द्र चौहान व श्री पूरणचन्द कश्यम एक दिवसीय उपवास में रहे। इसके अतिरिक्त आशीषगौड़, नीलिमास्वरुप मुजफ्फर नगर, दरभंगा बिहार से देवानन्द झा, मुम्बई से राजकुमार झा, खरीदाबाद से राखी, दिल्ली से साक्षी, देहरादून से नीतिन व सोनिया पाण्डे, इसके अतिरिक्त जिला बार काउन्सिल के अध्यक्ष एडवोकेट ललित उपाध्यक्ष, अरुण कुमार भदौरिया आदि ने अनशन अनशन स्थल पर आकर समर्थन किया।
Sunday, 25 April 2010
हारिल उपन्यास पर मैत्रेय पुस्तकालय नैहाटी द्वारा एक विचार गोष्ठी का आयोजन
24 अप्रिल को शंभुनाथ, प्रफुल्ल कोलख्यान, श्यामल भट्टाचार्य, सेराज खान बातिश, शैलैन्द्र, इन्दु सिंह, निशांत, संजय जायसवाल, आनंद, विमलेश त्रिपाठी आदि ने एक गंभीर पुस्तक चर्चा में भाग लिया.
Saturday, 17 April 2010
Tuesday, 6 April 2010
प्यारे जोशी की कहानी रह जाएगी
नेत्र बल्ल्भ जोशी की तेरहवीं पर उनके चाहनेवाले कलकत्ता, जबलपुर और दिल्ली से चलकर कुकुछिना पहुंचे. कलकत्ता से विजय शर्मा और मैं 28 मार्च को चलकर 30 की शाम को वहाँ पहुंचे. लखनऊ में रवीन्द्र शुक्ला भी मिल गये. हमलोग साथ साथ कुकुछिना पहुंचे. वहाँ जोशी जी का शोक संतप्त परिवार तो था ही आस पास के कई लोग बैठे हुए थे. यह देख कर तसल्ली हुई कि परिवार दु:खी तो था लेकिन अपने को संयत कर सकने में सफल था. दो दिनों बाद दिल्ली से बाणी शरद, बीना जी एवं तोषाण भी आ गये. हम सब जोशी जी को याद करते रहे. एक दुश्चिंता यह घेरे थी कि हमलोग जिस जगह से इतना जुड चुके हैं उस जगह से जोशी जी के चले जाने के बाद किस तरह अपने को जोडे रख सकते हैं. लगता है एक अध्याय खत्म हो गया. हम सब जोशी जी की तेरहवीं (2 अप्रिल) को उनके शोक संतप्त परिवार और स्वजनों के साथ थे. 3 तारीख को मैं कलकत्ता के लिए रवाना हुआ. बाद में सभी विदा हुए. प्यारे जोशी जी की कहानी रह जाएगी.
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